मलिहाबाद के कसमंडी कलां विवादित ढांचे पर पुरातत्व रिपोर्ट में बड़े खुलासे, कब्र और मस्जिदनुमा संरचना के संकेत

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लखनऊ (Social Activity BSP)। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र स्थित कसमंडी कलां का विवादित ढांचा एक बार फिर चर्चा में है। इस बार मामला राज्य पुरातत्व निदेशालय की सर्वे रिपोर्ट के बाद सुर्खियों में आया है, जिसमें संरचना से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने का दावा किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुरातत्व विभाग के निरीक्षण में उक्त स्थल पर कब्र एवं मस्जिद से जुड़े वास्तु तत्व पाए जाने का उल्लेख किया गया है।

जानकारी के मुताबिक, सर्वे रिपोर्ट में ढांचे के भीतर मेहराब, गुंबद, मीनार और इस्लामी स्थापत्य शैली से जुड़े कई तत्व मौजूद होने की बात कही गई है। इसके अलावा निर्माण में इस्तेमाल की गई लखौरी ईंटों और वास्तुकला के आधार पर विशेषज्ञों ने इसे 17वीं से 18वीं शताब्दी के बीच निर्मित संरचना माना है।

रिपोर्ट में कुछ कब्रनुमा अवशेषों का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें मकबरे से जुड़ी संरचना का संकेत माना जा रहा है। हालांकि इस पूरे मामले को लेकर अभी भी विवाद बरकरार है और अलग-अलग पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं।

एक पक्ष का दावा है कि यह स्थल महाराजा कंसा पासी के किले और प्राचीन मंदिर से जुड़ा ऐतिहासिक स्थान है, जबकि दूसरा पक्ष इसे पुरानी मस्जिद, मकबरा और कब्रिस्तान के रूप में पहचानता है। इसी कारण यह मामला संवेदनशील बना हुआ है और स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शांति व्यवस्था बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक अभिलेखों, निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया का इंतजार किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व से जुड़े ऐसे मामलों में तथ्यों का निर्धारण प्रमाणों और अधिकृत जांच के आधार पर ही किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति या सामाजिक तनाव से बचा जा सके।


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रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद








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